NTS STUDY

NTS STUDY

Nodal Theory of Structure : Every Node Matters, Every Structure Tells A Story.

पृथ्वी की सतह जियोइड अथवा दीर्घवृत

पृथ्वी की सतह: तीन रूप (Three Surfaces of Earth)

  • पृथ्वी की भौतिक सतह एक वास्तविकता है जिस पर सर्वेक्षण अवलोकन किए जाते हैं और बिंदु स्थित होते हैं। हालाँकि, इसकी परिवर्तनशील स्थलाकृतिक सतह और समग्र आकार के कारण, इसे गणितीय रूप से परिभाषित नहीं किया जा सकता है
  • इसलिए इसकी सतह पर स्थिति की गणना नहीं की जा सकती है। यही कारण है कि सीमित सीमा तक के सर्वेक्षणों में, पृथ्वी को समतल माना जाता है और स्थिति को परिभाषित करने के लिए समतल त्रिकोणमिति का उपयोग किया जाता है।
जियोइड(Geoid) और दीर्घवृत्त(Ellipsoid) के बीच अंतर


सर्वेक्षण में हम पृथ्वी की सतह को तीन अलग-अलग रूपों में देखते हैं:

1. भौतिक सतह (Physical Surface)

यह वह ऊबड़-खाबड़ सतह है जिस पर हम चलते हैं और सर्वे करते हैं। पहाड़ों और घाटियों के कारण इसे गणितीय रूप से परिभाषित करना असंभव है।

2. जियोइड (Geoid): भौतिक वास्तविकता

यदि हम पूरी पृथ्वी पर समुद्र के पानी को चैनल्स के माध्यम से प्रवाहित होने दें, तो जो एक समान 'गुरुत्वाकर्षण क्षमता' वाली सतह बनेगी, उसे जियोइड कहते हैं।

  • विशेषता: यह MSL (औसत समुद्र तल) के सबसे करीब है।

  • महत्व: सर्वेयर का प्लंब-बॉब (Plumb-bob) और स्पिरिट बबल हमेशा जियोइड के संदर्भ में काम करते हैं।

  • आकार: यह एक "गांठदार आलू" या नाशपाती जैसा अनियमित आकार है।

3. दीर्घवृत्त (Ellipsoid): गणितीय मॉडल

चूँकि जियोइड अनियमित है, इसलिए नक्शों और गणनाओं के लिए हमें एक चिकनी सतह चाहिए। पृथ्वी को अपनी धुरी पर घूमने के कारण चपटा माना जाता है, जिसे दीर्घवृत्त कहते हैं।

  • वैश्विक मानक: GRS80 (Geodetic Reference System 1980) सबसे सटीक वैश्विक दीर्घवृत्त है।

  • भारतीय संदर्भ: भारत और पाकिस्तान में एवरेस्ट (1830) दीर्घवृत्त का उपयोग किया जाता रहा है।


प्रमुख तकनीकी डेटा (Key Technical Data)

एक छात्र के रूप में परीक्षा के लिए ये आंकड़े बहुत महत्वपूर्ण हैं:

पैरामीटर (GRS80)मान (Value)
अर्ध-दीर्घ अक्ष (a)6,378,137.0 मी
अर्ध-लघु अक्ष (b)6,356,752.314 मी
चपटापन (f)$(a - b) / a$

जियोइड और दीर्घवृत्त के बीच अंतर

जियोइड और दीर्घवृत्त एक ही जगह पर नहीं होते। इनके बीच की ऊर्ध्वाधर दूरी को जियोइडल अनड्यूलेशन (Geoidal Undulation) या पृथक्करण कहते हैं। ईजीएम96 (EGM96) मॉडल के अनुसार, यह अंतर 100 मीटर से भी अधिक हो सकता है।


ऑर्थोमेट्रिक ऊँचाई (Orthometric Height - H)

जियोइड से किसी बिंदु की सीधी दूरी को ऑर्थोमेट्रिक ऊँचाई कहते हैं। यही वह ऊँचाई है जिसे हम सामान्यतः 'ऊँचाई' (Height above MSL) कहते हैं।

  • सूत्र: $H = h - N$

    (जहाँ $h$ = दीर्घवृत्तीय ऊँचाई जो GPS देता है, और $N$ = जियोइड पृथक्करण)

NTS Study - परीक्षा उपयोगी सुझाव:

  • एवरेस्ट दीर्घवृत्त (Everest Ellipsoid): भारतीय छात्रों को याद रखना चाहिए कि भारत के पुराने मानचित्र इसी पर आधारित हैं, जिसका अर्ध-दीर्घ अक्ष लगभग 6,377,276 मी है।

  • GPS और डेटम: GPS हमेशा दीर्घवृत्त (WGS84) पर ऊँचाई देता है, जिसे हमें जियोइड मॉडल का उपयोग करके MSL में बदलना पड़ता है।


दीर्घवृत्त (Ellipsoid): पृथ्वी का गणितीय मॉडल

चूंकि पृथ्वी ध्रुवों पर थोड़ी चपटी है, इसलिए इसे 'Oblate Spheroid' या दीर्घवृत्त माना जाता है। यह एक काल्पनिक लेकिन गणितीय रूप से शुद्ध सतह है।

प्रमुख पैरामीटर्स (Parameters)

एक दीर्घवृत्त को परिभाषित करने के लिए दो मुख्य मान चाहिए होते हैं:

  1. अर्ध-दीर्घ अक्ष (Semi-major axis - $a$): केंद्र से भूमध्य रेखा (Equator) तक की दूरी।

  2. अर्ध-लघु अक्ष (Semi-minor axis - $b$): केंद्र से ध्रुवों (Poles) तक की दूरी।

  3. चपटापन (Flattening - $f$): सूत्र:

    $$f = \frac{a - b}{a}$$

वैश्विक बनाम स्थानीय दीर्घवृत्त

पूरे विश्व के लिए एक ही दीर्घवृत्त फिट नहीं बैठता क्योंकि पृथ्वी हर जगह एक जैसी चपटी नहीं है। इसीलिए अलग-अलग देशों ने अपने क्षेत्र के लिए सबसे सटीक बैठने वाले 'स्थानीय दीर्घवृत्त' को अपनाया है।

तुलनात्मक चार्ट: विभिन्न देशों के दीर्घवृत्त

दीर्घवृत्ताभ (Ellipsoid)अर्ध-दीर्घ अक्ष (a मीटर)चपटापन (1/f)उपयोग का क्षेत्र
एवरेस्ट (1830)6,377,276300.8भारत, पाकिस्तान
GRS80 (1980)6,378,137298.25वैश्विक (GPS का आधार)
हवादार (1830)6,377,563299.3ग्रेट ब्रिटेन
क्लार्क (1866)6,378,206295.0उत्तर अमेरिका
बेसेल (1841)6,377,397299.2जापान, ईस्ट इंडीज

जियोइड और दीर्घवृत्त का अलगाव (Separation)

जियोइड (भौतिक वास्तविकता) और दीर्घवृत्त (गणितीय मॉडल) के बीच की ऊर्ध्वाधर दूरी को जियोइडल पृथक्करण (Geoidal Undulation) कहा जाता है।

  • यूके में यह अंतर 57 मीटर तक है।

  • वैश्विक स्तर पर यह अंतर 100 मीटर से अधिक हो सकता है।

  • त्रुटि: यदि यह अलगाव मात्र 6 मीटर हो, तो भी गणना में 1 PPM (Parts Per Million) की स्केल त्रुटि आ सकती है, जो बड़े इंजीनियरिंग प्रोजेक्ट्स के लिए गंभीर हो सकती है।


NTS Study Pro Tips: - परीक्षा उपयोगी महत्वपूर्ण तथ्य:

  • GRS80 (Geodetic Reference System 1980): यह आज का सबसे आधुनिक वैश्विक मानक है।

  • एवरेस्ट दीर्घवृत्त: भारतीय छात्रों को यह मान (6,377,276 m) याद रखना चाहिए क्योंकि भारत के अधिकांश पुराने "Topographical Maps" इसी पर आधारित हैं।

  • EGM96: यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण का सबसे सटीक मॉडल है जो जियोइड को परिभाषित करता है।


Surveying

📔 भाग 1: सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत (Fundamentals)

  1. सर्वेक्षण: एक विहंगम परिचय - भूमि सर्वेक्षण का अर्थ और महत्व।

  2. भूमि सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत - वर्गीकरण एवं सर्वेक्षण के प्रकार।

  3. प्राथमिक विभाजन (Primary Division) - Plane vs Geodetic Surveying का अर्थ।

  4. निरूपक भिन्न (Representative Fraction - RF) - स्केल और रिडक्शन फैक्टर का उपयोग।


📏 भाग 2: रैखिक माप और चेन सर्वे (Linear Measurement & Chain Survey)

  1. रैखिक माप और श्रृंखला सर्वेक्षण (Chain Survey) - बेसिक प्रक्रिया।

  2. चेन सर्वे में त्रुटियां एवं सुधार - जंजीर मापन की कमियां और उनका निवारण।

  3. दूरी मापने की विधियाँ और उनके दोष - रेखीय सर्वेक्षण की विस्तृत चर्चा।

  4. टेप या चेन में त्रुटियों का समायोजन - Correction for Sag, Temperature, and Pull.


🧭 भाग 3: कोणीय माप और उपकरण (Angular & Instrumental Survey)

  1. कंपास सर्वे (Compass Surveying) - दिकमान सर्वे और उसका उपयोग।

  2. प्लेन टेबल सर्वेक्षण (Plane Table) - प्रयोग होने वाले उपकरण और विधियां।

  3. थियोडोलाइट (Theodolite) - इसका प्रयोग कहाँ, क्यों और कैसे किया जाता है?

  4. टोटल स्टेशन (Total Station) - मुख्य भाग, विशेषताएं और आधुनिक उपयोग।


🏔️ भाग 4: लेवलिंग और ऊँचाई मापन (Levelling)

  1. लेवलिंग (Smtalan) की आवश्यकता - सर्वेक्षण में लेवलिंग क्यों ज़रूरी है?

  2. मुख्य रेखाएं, डेटम और बेंच मार्क - RL (Reduced Level) और Datum की परिभाषा।

  3. लेवलिंग उपकरण के प्रयोग के तरीके - Auto Level और Tilting Level का संचालन।


🛰️ भाग 5: आधुनिक तकनीक (Modern Technologies)

  1. रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) - INSAT और IRS Series की जानकारी।

  2. GIS और LIS प्रणाली - भौगोलिक सूचना प्रणाली और डेटा फंक्शनलिटी।

  3. लेजर स्कैनर (Laser Scanner) - इसका उपयोग और नियंत्रण।

  4. पृथ्वी की सतह: जियोइड (Geoid) - पृथ्वी का आकार और दीर्घवृत (Ellipsoid) की समझ।


📝 भाग 6: प्रैक्टिस और ऑब्जेक्टिव प्रश्न (MCQs)

  • Surveying: Quiz 1 (01-25): GPS, Remote Sensing, Photogrammetry, और Errors (Accuracy/Precision) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 2 (26-50): Ranging, EDM, Tacheometry, और Corrections (Sag, Slope, Temperature) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 3 (51-75): Contouring, Bearings (True/Magnetic), और Leveling (HI Method, BS/FS) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 4  (76-100): Chain errors, Transition curves, Reciprocal leveling, और Bowditch rule पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 5 (101-125): Plane table and Compass पर आधारित । 



Quick Revision:

Comments

All Pages