कंपास सर्वे या दिकमान सर्वे क्या होता है इसका उपयोग कैसे करते है?
कंपास सर्वे या दिकमान सर्वे क्या होता है इसका उपयोग कैसे करते है?
कंपास सर्वेक्षण (Compass survey) या दिक्मान सर्वे
- भूमि सर्वे करते समय हम कई तरह के उपकरण का प्रयोग करते है रेखीय माप के लिए चेन सर्वे करते है तथा कोणीय माप लेने के लिए हम कंपास अर्थात दिक्मान उपकरण का प्रयोग करते है।
- कंपास का प्रयोग क्षेत्र के कोणीय माप लेने के लिए किया जाता है इससे क्षेत्र को त्रिकोणी आकार में सर्वेक्षण किया जाता है इससे सर्वे में अत्यधिक शुद्धता आती है।
- चेन सर्वेक्षण का नुकसान यह है कि, केवल दूरी को मापा जाता है और इसलिए क्षेत्र को त्रिकोणों के नेटवर्क से ढंकना पड़ता है। यदि लंबाई के साथ-साथ एक पंक्ति के कोण को एक ज्ञात दिशा के संबंध में मापा जा सकता है जिससे अन्य रेखाओं की स्वतंत्र रेखा लंबाई को क्षेत्र पर अंकन करना संभव होता है। इसलिए, ऐसे मामलों में केवल त्रिकोणों के नेटवर्क के लिए सर्वे करना अति महत्वपूर्ण है।
- कम्पास एक ऐसा यंत्र है जिसका उपयोग चुंबकीय उत्तर-दक्षिण के संबंध में एक सर्वेक्षण लाइन की दिशा को मापने के लिए किया जा सकता है। चुंबकीय उत्तर-दक्षिण दिशा जो संदर्भ दिशा है उसे मेरिडियन (संदर्भ दिशा) कहा जाता है और रेखा के बीच कोण और मेरिडियन को बियरिंग कहा जाता है। एक लाइन की दिशा को मापने के लिए कंपास का उपयोग सर्वेक्षण में एक बड़ी सरलता आ जाती है।
- इस अध्याय में विभिन्न प्रकार के कंपास के निर्माण में, लाइनों की बियरिंग्स की देखभाल करने की प्रणाली, कम्पास के साथ माप से जुड़ी कुछ समस्याओं को समझाया गया है और फिर कंपास सर्वेक्षण में शामिल क्षेत्र का कार्य प्रस्तुत किया गया है।
सर्वेक्षण शुरू करने से पहले इन दो चीजों को समझना बहुत जरूरी है:
मेरिडियन (Meridian): वह संदर्भ दिशा (Reference direction) जिसके सापेक्ष कोण मापे जाते हैं। यह तीन प्रकार के होते हैं: वास्तविक (True), चुंबकीय (Magnetic), और स्वेच्छिक (Arbitrary)।
बियरिंग (Bearing): मेरिडियन और सर्वेक्षण रेखा के बीच का क्षैतिज कोण (Horizontal angle)।
कंपास के प्रकार और उनकी कार्यप्रणाली
कंपास दो के प्रकार होते हैं जो आमतौर पर उपयोग किए जाते हैं:
(i) प्रिज्मेटिक कंपास;
(ii) सर्वेक्षक कंपास।
(i) प्रिज्मीय कंपास (Prismatic Compass)
इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसमें साइटिंग (Sighting) और रीडिंग (Reading) एक साथ की जा सकती है।
अंकन (Graduation): इसमें 0° से 360° (W.C.B. System) तक के निशान होते हैं।
विशेषता: इसमें प्रिज्म लगा होता है जो उल्टे लिखे हुए अंकों को सीधा करके दिखाता है।
इसमें एक चुंबकीय सुई एक कठोर और नुकीली स्टील पाइवोट पर टिका होता है।
- नुकीले पाइवोट का शीर्ष एगेट कैप के द्वारा सुरक्षित रहता है।
- एक एल्यूमीनियम अंकन डिस्क सुई के शीर्ष पर पढ़ी जाती है। ऊपर से पढ़ने पर अंकन शून्य से 360° दक्षिणावर्त दिशा में होते हैं। उत्तर दिशा को शून्य डिग्री, पूर्व को 90°, दक्षिण को 180° और पश्चिम को 270° माना जाता है। हालाँकि, रीडिंग लेते समय अवलोकन दृष्टि की रेखा के दूसरे छोर पर होते हैं। इसलिए, पाठ्यांकों को 180° से स्थानांतरित कर दिया जाता है। अंकनो को उल्टा चिह्नित किया जाता है क्योंकि उन्हें एक प्रिज्म के माध्यम से पढ़ा जाता है।
(ii) सर्वेक्षक कंपास (Surveyor Compass)
- इसमें साइटिंग और रीडिंग अलग-अलग करनी पड़ती है।
इस प्रकार के कंपास में सर्वेक्षक कम्पास बॉक्स मे अंकन डिस्क दिया गया है और चुंबकीय सुई इसके ऊपर घूमने के लिए स्वतंत्र होती है। देखने में किसी प्रिज्म से अंतर नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसमें एक संकीर्ण स्लिट होती है।
इस प्रणाली में अंकन सर्कल घुमावदार दृष्टि और चुंबकीय सुई के साथ घुमाता है हमेशा उत्तर की ओर होता है। अंकन सुई की नोक पर पढ़ा जाता है।
दृष्टि की रेखा को ठीक करने के बाद, पठन सीधे ग्लास कवर के शीर्ष से लिया जाता है। इसलिए अंकन सीधे लिखे गए हैं (उलटा नहीं)। इस कंपास में अंकन शून्य से 90 डिग्री तक हैं, शून्य से उत्तर या दक्षिण में और पूर्व और पश्चिम में 90 डिग्री होता है। जैसे पूर्व में 20 डिग्री उत्तरी दिशा का कोण N20°E के रूप में लिखा जाता है, और दक्षिण से 40 डिग्री पूर्व का कोण S40°E के रूप में लिखा जाता है। हमेशा पहली इंगित दिशा उत्तर या दक्षिण और अंतिम दिशा पूर्व या पश्चिम दिशा को इंगित करता है।
अंकन (Graduation): इसमें 0° से 90° (Reduced Bearing System) तक के निशान होते हैं।
- विशेषता: इसमें रीडिंग सीधे ऊपर से कांच के माध्यम से ली जाती है।
इस प्रकार के कंपास में सर्वेक्षक कम्पास बॉक्स मे अंकन डिस्क दिया गया है और चुंबकीय सुई इसके ऊपर घूमने के लिए स्वतंत्र होती है। देखने में किसी प्रिज्म से अंतर नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसमें एक संकीर्ण स्लिट होती है।
इस प्रणाली में अंकन सर्कल घुमावदार दृष्टि और चुंबकीय सुई के साथ घुमाता है हमेशा उत्तर की ओर होता है। अंकन सुई की नोक पर पढ़ा जाता है।
दृष्टि की रेखा को ठीक करने के बाद, पठन सीधे ग्लास कवर के शीर्ष से लिया जाता है। इसलिए अंकन सीधे लिखे गए हैं (उलटा नहीं)। इस कंपास में अंकन शून्य से 90 डिग्री तक हैं, शून्य से उत्तर या दक्षिण में और पूर्व और पश्चिम में 90 डिग्री होता है। जैसे पूर्व में 20 डिग्री उत्तरी दिशा का कोण N20°E के रूप में लिखा जाता है, और दक्षिण से 40 डिग्री पूर्व का कोण S40°E के रूप में लिखा जाता है। हमेशा पहली इंगित दिशा उत्तर या दक्षिण और अंतिम दिशा पूर्व या पश्चिम दिशा को इंगित करता है।
अंकन (Graduation): इसमें 0° से 90° (Reduced Bearing System) तक के निशान होते हैं।
3. कंपास सर्वे की सीमाएं (Precautions)
एक इंजीनियर के तौर पर आपको यह भी बताना चाहिए कि कंपास का उपयोग कहाँ नहीं करना चाहिए:
जहाँ भारी चुंबकीय क्षेत्र हो (जैसे पावर हाउस या रेलवे लाइन के पास)।
जहाँ लोहे की वस्तुओं (स्थानीय आकर्षण - Local Attraction) की उपस्थिति ज्यादा हो।
कंपास सर्वे का उपयोग कैसे करें? (Field Procedure)
कंपास सर्वे का मुख्य उद्देश्य Traversing (चक्रमण) करना होता है। इसके मुख्य चरण इस प्रकार हैं:
1. स्टेशन का चयन (Selection of Stations)
सर्वेक्षण क्षेत्र के मुख्य बिंदुओं पर स्टेशन तय किए जाते हैं। ध्यान रहे कि स्टेशन ऐसी जगह हों जहाँ से अगला और पिछला स्टेशन साफ दिखाई दे।
2. केंद्रन और समतलन (Centering and Leveling)
Centering: ट्राइपॉड पर कंपास को इस तरह सेट करें कि वह ठीक स्टेशन खूँटी के ऊपर हो। इसके लिए 'प्लम बॉब' (Plumb bob) का उपयोग करें।
Leveling: यह सुनिश्चित करें कि कंपास का बॉक्स बिल्कुल समतल (Level) हो ताकि चुंबकीय सुई स्वतंत्र रूप से घूम सके।
Centering: ट्राइपॉड पर कंपास को इस तरह सेट करें कि वह ठीक स्टेशन खूँटी के ऊपर हो। इसके लिए 'प्लम बॉब' (Plumb bob) का उपयोग करें।
Leveling: यह सुनिश्चित करें कि कंपास का बॉक्स बिल्कुल समतल (Level) हो ताकि चुंबकीय सुई स्वतंत्र रूप से घूम सके।
3. साइटिंग और रीडिंग (Sighting and Reading)
Sighting: ऑब्जेक्ट वेन (Object vane) और आई स्लिट (Eye slit) की मदद से अगले स्टेशन पर रखी रेंजिंग रॉड को देखें।
Reading: जब सुई स्थिर हो जाए, तो प्रिज्मीय कंपास में प्रिज्म के माध्यम से और सर्वेयर कंपास में सीधे ऊपर से रीडिंग लें।
Sighting: ऑब्जेक्ट वेन (Object vane) और आई स्लिट (Eye slit) की मदद से अगले स्टेशन पर रखी रेंजिंग रॉड को देखें।
Reading: जब सुई स्थिर हो जाए, तो प्रिज्मीय कंपास में प्रिज्म के माध्यम से और सर्वेयर कंपास में सीधे ऊपर से रीडिंग लें।
प्रिज्मीय बनाम सर्वेक्षक कंपास: मुख्य अंतर
जैसा कि आपने उल्लेख किया, इनमें मुख्य अंतर इनके Graduated Ring और Reading System का होता है:
| विशेषता | प्रिज्मीय कंपास (Prismatic) | सर्वेक्षक कंपास (Surveyor) |
| रीडिंग प्रणाली | W.C.B. ($0^{\circ}$ to $360^{\circ}$) | Reduced Bearing ($0^{\circ}$ to $90^{\circ}$) |
| अंकन (Graduation) | उल्टा (Inverted) लिखा होता है | सीधा लिखा होता है |
| सुई (Needle) | ब्रॉड सुई, डिस्क के साथ जुड़ी होती है | एज-बार सुई, सुई स्वतंत्र घूमती है |
| उपयोग | हाथ में पकड़कर भी रीडिंग ली जा सकती है | बिना ट्राइपॉड के उपयोग संभव नहीं है |
लोकल अट्रैक्शन (Local Attraction) - एक महत्वपूर्ण बात
कंपास सर्वे करते समय सबसे बड़ी चुनौती लोकल अट्रैक्शन होती है। अगर पास में बिजली के खंभे, स्टील की चेन या कोई लोहे की वस्तु है, तो चुंबकीय सुई भटक जाती है।
इसे चेक करने के लिए हर लाइन की Fore Bearing (FB) और Back Bearing (BB) लेनी चाहिए।
यदि $(FB - BB) = 180^{\circ}$ है, तो स्टेशन लोकल अट्रैक्शन से मुक्त है।
तालिका: प्रिज्मीय बनाम सर्वेक्षक कंपास
| अंतर का आधार | प्रिज्मीय कंपास | सर्वेक्षक कंपास |
| रीडिंग सिस्टम | Whole Circle Bearing ($0^{\circ}$ to $360^{\circ}$) | Quadrantal Bearing ($0^{\circ}$ to $90^{\circ}$) |
| प्रिज्म | होता है | नहीं होता |
| ट्राइपॉड | अनिवार्य नहीं है | अनिवार्य है |
| सुई | ब्रॉड सुई (Broad Needle) | एज बार सुई (Edge bar Needle) |
दोनों प्रकार के कंपास के आवश्यक हिस्सों हैं:
(i) एक चुंबकीय सुई,
(ii) एक अंकित सर्कल,
(iii) दृष्टि की एक पंक्ति, और
(iv) उन्हें रखने के लिए एक बॉक्स।
दोनो प्रकार के कंपास के आवश्यक हिस्सों में कुछ अंतर हैं। दोनो प्रकार के कंपास का निर्माण समझाया गया है और इस लेख में उनके अंतर को इंगित किया गया है।

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