लेवेलिंग या समतलन कैसे और क्यों आवश्यक होता है सर्वेक्षण मे
लेवेलिंग या समतलन: सर्वेक्षण की आधारशिला
जब भूमि सर्वेक्षण में रेखीय (Linear) और कोणीय (Angular) माप के अलावा ऊंचाई (Height) और गहराई (Depth) की माप लेनी होती है, तो उस विधि को लेवेलिंग या समतलीकरण कहते हैं। सरल शब्दों में, डेटम लाइन (Datum Line) के सापेक्ष किसी बिंदु की ऊंचाई निर्धारित करने की कला ही लेवेलिंग है।
लेवेलिंग का मुख्य उद्देश्य (Objectives)
किसी निश्चित डेटम के सापेक्ष बिंदुओं की ऊंचाई (RL) ज्ञात करना।
सड़क, रेलवे, या नहर के निर्माण के लिए जमीन पर वांछित ढाल (Gradient) स्थापित करना।
मानचित्रों पर 'कंटूर लाइन्स' (Contour Lines) तैयार करना।
लेवेलिंग की आवश्यकता क्यों है? (Importance)
सर्वेक्षण में लेवेलिंग निम्नलिखित कार्यों के लिए अनिवार्य है:
भवन निर्माण: प्लिंथ लेवल (Plinth Level) और फाउंडेशन की गहराई तय करने के लिए।
परिवहन इंजीनियरिंग: सड़कों और रेलवे लाइनों का संरेखण (Alignment) और ग्रेडिएंट तय करने के लिए।
सिंचाई: नहरों और सीवेज लाइनों में पानी के प्राकृतिक बहाव के लिए सही ढाल सुनिश्चित करने के लिए।
जलाशय: बांधों की ऊंचाई और पानी स्टोर करने की क्षमता (Capacity) मापने के लिए।
लेवेलिंग से जुड़ी महत्वपूर्ण तकनीकी शब्दावली
लेवेलिंग को समझने के लिए इन शब्दों का ज्ञान होना अनिवार्य है:
समतल सतह (Level Surface): पृथ्वी की वक्रता (Curvature) के समानांतर सतह। इस पर स्थित सभी बिंदु पृथ्वी के केंद्र से समान दूरी पर होते हैं।
क्षैतिज सतह (Horizontal Surface): किसी बिंदु पर समतल सतह की स्पर्शरेखा (Tangent)। यह साहुल रेखा (Plumb line) के समकोण पर होती है।
डेटम (Datum): वह संदर्भ सतह जिसके सापेक्ष अन्य बिंदुओं की ऊंचाई मापी जाती है।
मीन सी लेवल (MSL): ज्वार-भाटा की 19 वर्षों की औसत ऊंचाई। भारत का MSL मुंबई हाई है।
रिड्यूस्ड लेवल (RL): डेटम से किसी बिंदु की ऊर्ध्वाधर ऊंचाई (Vertical height)।
बेंचमार्क (Benchmark - BM) के प्रकार
बंचमार्क एक अपेक्षाकृत स्थायी संदर्भ बिंदु है जिसका RL हमें पहले से ज्ञात होता है।
| बेंचमार्क का प्रकार | विवरण |
| GTS Benchmark | सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा पूरे देश में स्थापित (उच्चतम सटीकता)। |
| स्थायी (Permanent) BM | PWD जैसे विभागों द्वारा सार्वजनिक भवनों या पुलों पर स्थापित। |
| स्वैच्छिक (Arbitrary) BM | छोटे प्रोजेक्ट्स के लिए किसी भी स्थायी बिंदु को मान लिया गया लेवल (जैसे 100.00 m)। |
| अस्थायी (Temporary) BM | दिन का कार्य समाप्त होने पर अगले दिन के लिए छोड़ा गया बिंदु। |
लेवेलिंग में उपयोग होने वाले उपकरण
समतलन के लिए मुख्य रूप से दो उपकरणों का तालमेल आवश्यक है:
लेवल (Level): जैसे डंपी लेवल (Dumpy Level), ऑटो लेवल, या टिल्टिंग लेवल।
लेवलिंग स्टाफ (Leveling Staff): जिस पर माप अंकित होते हैं।
लेवेलिंग प्रक्रिया के कुछ और महत्वपूर्ण शब्द
Back Sight (BS):
उपकरण सेट करने के बाद 'ज्ञात RL' (बेंचमार्क) पर ली गई पहली रीडिंग।
बैक साइट (Back Sight) का महत्व
BS सिर्फ एक रीडिंग नहीं है, बल्कि यह वह कड़ी है जो आपके सर्वे को जमीन की वास्तविक ऊंचाई (MSL) से जोड़ती है।
Height of Instrument (HI) निकालना: बिना BS के आप उपकरण की ऊंचाई (HI) नहीं जान सकते। इसका फार्मूला है:
$$HI = RL \text{ of Benchmark} + \text{Back Sight (BS)}$$उपकरण शिफ्ट करना: जब भी आप अपना 'डंपी लेवल' या 'ऑटो लेवल' एक जगह से दूसरी जगह ले जाते हैं (Change Point), तो नई जगह पर ली जाने वाली पहली रीडिंग हमेशा Back Sight ही होगी।
Fore Sight (FS): उपकरण शिफ्ट करने से पहले ली गई आखिरी रीडिंग।
फोर साइट (Fore Sight) का महत्व
FS का मुख्य काम सर्वे के एक चरण को समाप्त करना या अगले चरण से जुड़ना होता है।
सर्वे का समापन: जब उस दिन का काम पूरा हो जाता है, तो जो आखिरी रीडिंग ली जाती है, उसे FS कहते हैं।
चेंज पॉइंट (Change Point - CP): जब दूरी बहुत बढ़ जाए या बाधा आ जाए और हमें मशीन शिफ्ट करनी पड़े, तो मशीन हटाने से पहले जो आखिरी रीडिंग ली जाती है, वह FS होती है।
रिड्यूस्ड लेवल (RL) की गणना कैसे करें?
जब आपके पास HI (Height of Instrument) हो, तो नए बिंदु का RL निकालने के लिए आप FS को घटाते हैं:
एक प्रैक्टिकल उदाहरण:
मान लीजिए आपके उपकरण की ऊंचाई ($HI$) 101.50 m है। आपने एक दूर के बिंदु पर स्टाफ देखा और रीडिंग 2.10 m आई। अब आपको मशीन वहां ले जानी है।
तो उस बिंदु का RL होगा:
अब जब आप मशीन शिफ्ट करेंगे, तो इसी 99.40 m वाले बिंदु पर जो पहली रीडिंग लेंगे, वो फिर से Back Sight (BS) बन जाएगी।
BS और FS के बीच का बड़ा अंतर
| अंतर का आधार | बैक साइट (Back Sight) | फोर साइट (Fore Sight) |
| रीडिंग का क्रम | मशीन सेट करने के बाद पहली रीडिंग। | मशीन शिफ्ट करने से पहले आखिरी रीडिंग। |
| बिंदु का स्वभाव | ज्ञात RL (Known Level) वाले बिंदु पर। | अज्ञात RL (Unknown Level) वाले बिंदु पर। |
| कैलकुलेशन | इसे RL में जोड़ा जाता है ($HI$ के लिए)। | इसे $HI$ में से घटाया जाता है ($RL$ के लिए)। |
Intermediate Sight (IS): BS और FS के बीच ली गई सभी अन्य रीडिंग्स।
इंटरमीडिएट साइट (Intermediate Sight) का महत्व
IS का उपयोग तब किया जाता है जब हमें एक ही स्टेशन से कई बिंदुओं की ऊंचाई (RL) जाननी हो, जैसे कि किसी सड़क का क्रॉस-सेक्शन लेते समय या किसी बड़े प्लॉट का सर्वे करते समय।
विशेषता: IS लेने के बाद मशीन को शिफ्ट नहीं किया जाता।
गणना (Calculation): IS का उपयोग भी RL निकालने के लिए किया जाता है। इसका फार्मूला FS जैसा ही होता है:
$$RL \text{ of point} = HI - IS$$
एक प्रैक्टिकल उदाहरण से समझें (Step-by-Step)
मान लीजिए आप एक सड़क का सर्वे कर रहे हैं:
आपने मशीन सेट की और बेंचमार्क ($RL = 100.00$) पर पहली रीडिंग ली: 1.20 m (BS)।
अब आपकी $HI = 100.00 + 1.20 = 101.20 \text{ m}$ हो गई।
अब आपने सड़क पर 10-10 मीटर की दूरी पर 3 और पॉइंट्स देखे जिनकी रीडिंग्स आईं: 1.50 m, 1.80 m, और 2.00 m।
ये तीनों Intermediate Sights (IS) हैं।
अब सड़क के अंत में आपने आखिरी रीडिंग ली: 2.50 m (FS)।
इन पॉइंट्स का RL कैसे निकलेगा?
Point 1 ($IS$): $101.20 - 1.50 = 99.70 \text{ m}$
Point 2 ($IS$): $101.20 - 1.80 = 99.40 \text{ m}$
Point 3 ($IS$): $101.20 - 2.00 = 99.20 \text{ m}$
Final Point ($FS$): $101.20 - 2.50 = 98.70 \text{ m}$
BS, IS और FS की तुलना
| रीडिंग टाइप | मशीन की स्थिति | उपयोग |
| Back Sight (BS) | सेट करने के बाद पहली | मशीन की ऊंचाई ($HI$) जानने के लिए। |
| Intermediate Sight (IS) | बीच की सभी रीडिंग्स | बीच के बिंदुओं का लेवल जानने के लिए। |
| Fore Sight (FS) | शिफ्ट करने से पहले आखिरी | उस स्टेशन का काम खत्म करने के लिए। |
लेवेलिंग की तीन मुख्य रीडिंग्स (याद रखने का तरीका)
| रीडिंग | कब ली जाती है? | काम क्या है? |
| Back Sight (BS) | सबसे पहले (ज्ञात बिंदु पर) | HI सेट करने के लिए। |
| Intermediate Sight (IS) | बीच के बिंदुओं पर | अलग-अलग बिंदुओं का RL निकालने के लिए। |
| Fore Sight (FS) | सबसे अंत में (अंतिम बिंदु पर) | सर्वे को पूरा करने या इंस्ट्रूमेंट शिफ्ट करने के लिए। |
Surveying
📔 भाग 1: सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत (Fundamentals)
सर्वेक्षण: एक विहंगम परिचय - भूमि सर्वेक्षण का अर्थ और महत्व।भूमि सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत - वर्गीकरण एवं सर्वेक्षण के प्रकार।प्राथमिक विभाजन (Primary Division) - Plane vs Geodetic Surveying का अर्थ।निरूपक भिन्न (Representative Fraction - RF) - स्केल और रिडक्शन फैक्टर का उपयोग।
📏 भाग 2: रैखिक माप और चेन सर्वे (Linear Measurement & Chain Survey)
रैखिक माप और श्रृंखला सर्वेक्षण (Chain Survey) - बेसिक प्रक्रिया।चेन सर्वे में त्रुटियां एवं सुधार - जंजीर मापन की कमियां और उनका निवारण।दूरी मापने की विधियाँ और उनके दोष - रेखीय सर्वेक्षण की विस्तृत चर्चा।टेप या चेन में त्रुटियों का समायोजन - Correction for Sag, Temperature, and Pull.
🧭 भाग 3: कोणीय माप और उपकरण (Angular & Instrumental Survey)
कंपास सर्वे (Compass Surveying) - दिकमान सर्वे और उसका उपयोग।प्लेन टेबल सर्वेक्षण (Plane Table) - प्रयोग होने वाले उपकरण और विधियां।थियोडोलाइट (Theodolite) - इसका प्रयोग कहाँ, क्यों और कैसे किया जाता है?टोटल स्टेशन (Total Station) - मुख्य भाग, विशेषताएं और आधुनिक उपयोग।
🏔️ भाग 4: लेवलिंग और ऊँचाई मापन (Levelling)
लेवलिंग (Smtalan) की आवश्यकता - सर्वेक्षण में लेवलिंग क्यों ज़रूरी है?मुख्य रेखाएं, डेटम और बेंच मार्क - RL (Reduced Level) और Datum की परिभाषा।लेवलिंग उपकरण के प्रयोग के तरीके - Auto Level और Tilting Level का संचालन।
🛰️ भाग 5: आधुनिक तकनीक (Modern Technologies)
रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) - INSAT और IRS Series की जानकारी।GIS और LIS प्रणाली - भौगोलिक सूचना प्रणाली और डेटा फंक्शनलिटी।लेजर स्कैनर (Laser Scanner) - इसका उपयोग और नियंत्रण।पृथ्वी की सतह: जियोइड (Geoid) - पृथ्वी का आकार और दीर्घवृत (Ellipsoid) की समझ।
📝 भाग 6: प्रैक्टिस और ऑब्जेक्टिव प्रश्न (MCQs)
Surveying: Quiz 1 (01-25): GPS, Remote Sensing, Photogrammetry, और Errors (Accuracy/Precision) पर आधारित।Surveying: Quiz 2 (26-50): Ranging, EDM, Tacheometry, और Corrections (Sag, Slope, Temperature) पर आधारित।
Surveying: Quiz 3 (51-75): Contouring, Bearings (True/Magnetic), और Leveling (HI Method, BS/FS) पर आधारित।Surveying: Quiz 4 (76-100): Chain errors, Transition curves, Reciprocal leveling, और Bowditch rule पर आधारित।Surveying: Quiz 5 (101-125): Plane table and Compass पर आधारित ।


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