NTS STUDY

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Nodal Theory of Structure : Every Node Matters, Every Structure Tells A Story.

IS 1269 : 1997 Part 1 & 2 Steel Tape Measures

 IS 1269 : 1997 Part 1 & 2 Steel Tape Measures

IS 1269 (Part 1 & 2): 1997 भारतीय मानक ब्यूरो द्वारा जारी किया गया वह मानक है जो यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण स्थल (Construction Site) पर इस्तेमाल होने वाला स्टील टेप पूरी तरह सटीक है।

IS 1269 भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित एक अत्यंत महत्वपूर्ण मानक है, जो स्टील टेप माप (Steel Tape Measures) की सटीकता और गुणवत्ता को परिभाषित करता है। यह पुराने मानक IS 1491 का स्थान ले चुका है और वर्तमान में सिविल इंजीनियरिंग, सर्वेइंग और निर्माण कार्यों में इसी का पालन किया जाता है। 1997 के इस अपडेटेड वर्जन के अनुसार एक मानक टेप में निम्नलिखित विशिष्टताएँ होनी चाहिए:

भौतिक विशेषताएँ (Physical Characteristics)

  • सामग्री (Material): टेप को उच्च गुणवत्ता वाले स्टील या स्टेनलेस स्टील से बना होना चाहिए। इसकी सतह चिकनी होनी चाहिए और किनारे नुकीले नहीं होने चाहिए।

  • चौड़ाई (Width): आमतौर पर स्टील टेप की चौड़ाई 10 mm से 15 mm के बीच होनी चाहिए।

  • सुरक्षात्मक परत (Coating): पेंट और निशानों को मिटने से बचाने के लिए टेप पर एक पारदर्शी और सख्त कोटिंग (जैसे लाह या प्लास्टिक) होनी अनिवार्य है।

शुद्धता की श्रेणियाँ (Accuracy Classes)

IS 1269 के तहत टेप को दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है:

  • Class I (प्रथम श्रेणी): यह अत्यंत सटीक होती है, जिसका उपयोग उच्च स्तर के सर्वेइंग और प्रयोगशाला कार्यों में किया जाता है।

  • Class II (द्वितीय श्रेणी): यह सामान्य निर्माण और साइट कार्यों के लिए उपयोग की जाती है।

अनुमत त्रुटि (Permissible Error)

मानक के अनुसार, टेप की लंबाई में होने वाली त्रुटि के लिए एक फॉर्मूला दिया गया है। 20°C के मानक तापमान पर अधिकतम स्वीकार्य त्रुटि ($a + bL$) mm होती है:

  • Class I के लिए: $\pm (0.1 + 0.1L)$ mm

  • Class II के लिए: $\pm (0.3 + 0.2L)$ mm

    (यहाँ $L$ मीटर में टेप की लंबाई है)

चिन्हांकन (Marking Requirements)

टेप के अंत में या शुरुआती हिस्से पर निम्नलिखित जानकारी होनी अनिवार्य है:

  • निर्माता का नाम या लोगो।

  • सटीकता वर्ग (Class I या Class II)—यह एक आयत (rectangle) के अंदर लिखा होता है।

  • टेप की कुल लंबाई।

  • वह तापमान जिस पर टेप कैलिब्रेट की गई है (आमतौर पर 20°C)।

  • वह खिंचाव बल (Tension force) जिस पर टेप सही माप देती है (जैसे 50N या 20N)।

निर्माण और सामग्री (Construction & Material)

  • सामग्री: टेप अच्छी गुणवत्ता वाले कार्बन स्टील या स्टेनलेस स्टील की बनी होनी चाहिए।

  • कोटिंग: घर्षण और जंग से बचाने के लिए टेप पर लेपित (Coating) परत होनी चाहिए ताकि पेंट या मार्किंग जल्दी न मिटे।

  • लंबाई: यह आमतौर पर 1m, 2m, 3m, 5m, 10m, 20m, 30m, और 50m की लंबाई में उपलब्ध होते हैं।


संदर्भ शर्तें (Reference Conditions)

एक आदर्श स्टील टेप तभी सही माप देता है जब उसे मानक स्थितियों में इस्तेमाल किया जाए:

  • मानक तापमान (Standard Temperature): टेप को 20°C के तापमान पर कैलिब्रेट किया जाता है।

  • खिंचाव बल (Standard Tension): * 5 मीटर से कम के टेप के लिए कोई विशिष्ट तनाव नहीं।

    • 5 मीटर या उससे अधिक के टेप के लिए 50 N (लगभग 5 किलोग्राम) का खिंचाव बल लगाया जाना चाहिए ताकि वह झोल (sag) न खाए।

टेप पर अनिवार्य सूचना (Information on Tape)

टेप के शुरुआती हिस्से (लगभग पहले 20-30 cm के भीतर) पर ये बातें लिखी होनी चाहिए:

  1. नाम: निर्माता का नाम या ट्रेडमार्क।

  2. लंबाई: टेप की नाममात्र लंबाई (Nominal Length) जैसे 30 m।

  3. शुद्धता वर्ग: रोमन अंकों में (I) या (II) एक आयत के भीतर।

  4. ISI मार्क: गुणवत्ता का आधिकारिक प्रमाण।

  5. वर्ष: निर्माण का वर्ष (यदि आवश्यक हो)।

अंत फिटिंग (End Fittings)

  • टेप के अंत में एक मजबूत रिंग या हुक होना चाहिए।

  • हुक या रिंग को टेप के साथ मजबूती से रिवेट (rivet) किया जाना चाहिए ताकि उपयोग के दौरान वह ढीला न पड़े।

शून्य बिंदु (Zero Point)

IS 1269 के अनुसार 'Zero' की स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए। यह या तो हुक के सिरे से शुरू होती है या टेप पर एक स्पष्ट रेखा से, जिसे "A" या "B" टाइप के अंत (End pieces) कहा जाता है।


सिविल इंजीनियर के लिए टिप: साइट पर काम शुरू करने से पहले यह जरूर चेक करें कि आपके टेप पर Class II का मार्क है या नहीं, क्योंकि बिना क्लास मार्क वाले टेप में 30 मीटर की दूरी पर 5-10 cm तक की गलती हो सकती है, जो स्ट्रक्चरल लेआउट के लिए जोखिम भरा है। 

IS 1269 का इतिहास और इसके अपडेट होने के वर्ष निम्नलिखित हैं:

यह मानक (Standard) पहली बार 1958 में तैयार किया गया था। लेकिन समय के साथ इसमें सुधार किए गए और इसे अलग-अलग भागों में बांटा गया।

मुख्य अपडेट (Revisions):

  1. प्रथम प्रकाशन: 1958 (उस समय यह केवल एक ही भाग में था)।

  2. पहला बड़ा संशोधन (Revision): 1964 में इसे अपडेट किया गया।

  3. दूसरा बड़ा संशोधन: 1979 में इसे फिर से संशोधित किया गया।

  4. वर्तमान वर्जन: वर्तमान में जो मानक प्रभावी है, उसे 1997 में संशोधित (Third Revision) किया गया था। इसे IS 1269:1997 के नाम से जाना जाता है।

भागों में विभाजन:

आज के समय में इसे दो प्रमुख भागों में पढ़ा जाता है:

  • IS 1269 (Part 1): 1997 – (Material, construction, and markings के लिए)।

  • IS 1269 (Part 2): 1997 – (Accuracy/परिशुद्धता और परीक्षण के तरीकों के लिए)।

संक्षेप में: अगर आपसे कोई पूछे कि यह कोड कब बना, तो इसका मूल वर्ष 1958 है, लेकिन वर्तमान में हम 1997 के अपडेटेड वर्जन का पालन करते हैं।



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