NTS STUDY

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Nodal Theory of Structure : Every Node Matters, Every Structure Tells A Story.

IS 2988:1995 Vernier Callipers Specification and their uses

 IS 2988:1995 भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा निर्धारित एक महत्वपूर्ण कोड है जो Vernier Callipers (वर्नियर कैलीपर्स) के विनिर्देशों (specifications) को परिभाषित करता है। यह इस मानक का प्रथम संशोधन (First Revision) है।

एक सिविल इंजीनियर या मैकेनिकल कार्य में लगे प्रोफेशनल के लिए, यह कोड यह सुनिश्चित करता है कि मापन (measurement) के लिए उपयोग किया जाने वाला वर्नियर कैलीपर सटीक और मानक गुणवत्ता का है।

IS 2988:1995 भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) द्वारा वर्नियर कैलीपर (Vernier Calliper) की बनावट, शुद्धता और गुणवत्ता के लिए निर्धारित दिशा-निर्देश है। इस कोड के अनुसार, एक मानक वर्नियर कैलीपर में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिए:

यहाँ इस कोड के अनुसार मुख्य आवश्यकताएं दी गई हैं:


मुख्य उपयोग (Scope)

यह मानक $1$ मीटर ($1000$ mm) तक की मापन क्षमता वाले वर्नियर कैलीपर्स पर लागू होता है। इसका उपयोग मुख्य रूप से निम्नलिखित के लिए किया जाता है:

  • External Measurement: बाहरी व्यास या लंबाई।

  • Internal Measurement: आंतरिक व्यास या चौड़ाई।

  • Depth Measurement: गहराई (यदि गहराई मापने वाली छड़ दी गई हो)।

सामग्री (Material)

IS 2988 के अनुसार, वर्नियर कैलीपर को उच्च गुणवत्ता वाले Stain-resistant Steel या Tool Steel से बना होना चाहिए।

  • Hardness (कठोरता): इसके मापने वाले चेहरे (Measuring faces) पर्याप्त रूप से कठोर होने चाहिए कोड के अनुसार इनकी कठोरता 650 HV (Vickers Hardness) से कम नहीं होनी चाहिए। (लगभग $650$ HV या $58$ HRC) ताकि वे बार-बार उपयोग से घिसे नहीं।

सटीकता और ग्रेजुएशन (Accuracy & Graduations)

  • Least Count: मानक के अनुसार वर्नियर आमतौर पर $0.1$ mm, $0.05$ mm, या $0.02$ mm की सटीकता (Least Count) में होने चाहिए।

  • Scale Marking: मुख्य स्केल (Main Scale) और वर्नियर स्केल (Vernier Scale) पर निशान बहुत ही बारीक, स्पष्ट और स्थायी होने चाहिए। निशानों की मोटाई $0.1$ mm से $0.2$ mm के बीच होनी चाहिए।

बनावट की शर्तें (Construction)

  • मुख्य बीम (Main Beam): यह बिल्कुल सीधी और झोल-रहित होनी चाहिए। इस पर मुख्य स्केल (Main Scale) अंकित होता है।

  • जबड़े (Jaws): इसमें दो तरह के जबड़े होने चाहिए:

    • External Jaws: बाहर की चौड़ाई या व्यास मापने के लिए।

    • Internal Jaws: छेद या पाइप के अंदर का व्यास मापने के लिए।

  • स्लाइडिंग फिट (Sliding Fit): चलने वाला हिस्सा (Sliding jaw) बीम पर बिना किसी रुकावट या ढीलेपन के चलना चाहिए।

  • लॉकिंग स्क्रू (Locking Screw): माप लेने के बाद उसे फिक्स करने के लिए एक लॉकिंग नट या स्क्रू होना अनिवार्य है।

ग्रेजुएशन और स्केल (Graduation)

  • स्पष्टता: मुख्य स्केल और वर्नियर स्केल पर निशान बहुत ही बारीक और स्थायी होने चाहिए।

  • निशान की मोटाई: निशानों की चौड़ाई 0.05 mm से 0.2 mm के बीच होनी चाहिए ताकि पढ़ने में गलती न हो।

  • लीस्ट काउंट (Least Count): मानक के अनुसार वर्नियर आमतौर पर 0.1 mm, 0.05 mm या 0.02 mm की सटीकता वाले होने चाहिए।

मापने की सतह (Measuring Faces)

  • जब वर्नियर को पूरी तरह बंद किया जाए, तो इसके जबड़ों के बीच कोई गैप (रोशनी) नहीं दिखनी चाहिए।

  • आंतरिक माप लेने वाले जबड़े (Internal jaws) चाकू की तरह तेज और सटीक होने चाहिए ताकि छोटी जगहों में आसानी से जा सकें।

अनुमत त्रुटि (Permissible Error)

IS 2988 के अनुसार, वर्नियर की लंबाई के आधार पर त्रुटि की सीमा तय है। उदाहरण के लिए:

  • 0-200 mm तक की रेंज वाले कैलीपर के लिए अधिकतम स्वीकार्य त्रुटि लगभग $\pm 0.02$ mm से $\pm 0.05$ mm के बीच होती है।

अनिवार्य मार्किंग (Marking on Instrument)

हर मानक वर्नियर कैलीपर पर ये विवरण अंकित होने चाहिए:

  1. निर्माता का नाम या ट्रेडमार्क।

  2. मापने की रेंज (जैसे 0-150 mm या 0-300 mm)।

  3. लीस्ट काउंट (जैसे 0.02 mm)।

  4. ISI मार्क का चिन्ह (यह सुनिश्चित करता है कि यह IS 2988 के अनुरूप है)।

सिविल इंजीनियरिंग में महत्व:

हालांकि साइट पर अक्सर टेप (IS 1269) का उपयोग होता है, लेकिन जब आपको Reinforcement Bars (सरिया) का सटीक व्यास नापना हो या किसी कंक्रीट मोल्ड की आंतरिक चौड़ाई चेक करनी हो,और बोल्ट/नट की सटीकता चेक करने के लिए किया जाता है। तब वर्नियर कैलीपर का उपयोग किया जाता है।

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