Diffrence Between Amendment v Reaffirmed of IS Codes
भारतीय मानक (IS Codes) के संदर्भ में Reaffirmed और Amendment दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। इनका अंतर समझना एक सिविल इंजीनियर के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह बताता है कि आप जो कोड पढ़ रहे हैं वह कितना अपडेटेड है।
यहाँ इन दोनों के बीच मुख्य अंतर दिया गया है:
1. Amendment (संशोधन)
संशोधन का अर्थ है कोड के मौजूदा नियमों, टेबल या वैल्यूज में बदलाव करना।
उद्देश्य: जब नई तकनीक आती है या पुराने डेटा में गलती पाई जाती है, तो BIS 'Amendment' जारी करता है।
प्रक्रिया: इसमें कोड के किसी विशिष्ट क्लॉज (Clause) को बदला जाता है, हटाया जाता है या नया क्लॉज जोड़ा जाता है
। प्रभाव: अमेंडमेंट आने के बाद पुराना वाला नियम अमान्य हो जाता है और नया नियम लागू होता है
।
2. Reaffirmed (पुनः पुष्टि)
री-अफर्म्ड का अर्थ है कोड को बिना किसी बदलाव के फिर से मान्य घोषित करना।
उद्देश्य: BIS हर 5 साल (लगभग) में यह जांचता है कि क्या कोई पुराना कोड अभी भी वर्तमान समय के लिए सही है या नहीं।
प्रक्रिया: यदि टेक्निकल कमेटी को लगता है कि कोड में किसी बदलाव की जरूरत नहीं है और वह आज भी सही जानकारी दे रहा है, तो उसे 'Reaffirm' कर दिया जाता है
। उदाहरण: "IS 456: 2000" के कवर पेज पर आप देख सकते हैं: (Reaffirmed 2011), (Reaffirmed 2016), (Reaffirmed 2021)
। इसका मतलब है कि 2021 में BIS ने माना कि 2000 वाला कोड अभी भी पूरी तरह सही है 。 प्रभाव: इसमें कोड के अंदर का कोई भी क्लॉज या वैल्यू नहीं बदलती, बस उसकी वैधता (Validity) बढ़ जाती है
।
मुख्य अंतर तालिका (Summary Table)
| विशेषता | Amendment (संशोधन) | Reaffirmed (पुनः पुष्टि) |
| बदलाव | क्लॉज, टेबल या वैल्यू में बदलाव होता है | कोड में कोई बदलाव नहीं होता |
| कारण | नई तकनीक या सुधार की जरूरत | समय-समय पर कोड की प्रासंगिकता जांचना |
| पहचान | Amd 1, Amd 2 आदि लिखा होता है | Reaffirmed Year (जैसे 2021) लिखा होता है |
| जरूरत | इसे कोड के साथ अलग से पढ़ना अनिवार्य है | यह केवल यह बताता है कि कोड अभी भी वैध है |
नोट: एक इंजीनियर के तौर पर आपको हमेशा Latest Amendment के साथ Reaffirmed वर्जन का ही उपयोग करना चाहिए
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