रिमोट सेंसिंग /सुदूर संवेदन /INSAT Series /IRS Series क्या होते है ?
रिमोट सेंसिंग (सुदूर संवेदन) क्या है?
रिमोट सेंसिंग वह तकनीक है जिसके द्वारा हम किसी वस्तु या क्षेत्र के भौतिक संपर्क में आए बिना उसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। यह उपग्रहों (Satellites) या विमानों पर लगे सेंसर के माध्यम से किया जाता है।
रिमोट सेंसिंग को वस्तुओं, क्षेत्र या घटना के बारे में बिना भौतिक संपर्क के जानकारी एकत्र करने की कला और विज्ञान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। नेत्र दृष्टि और तस्वीरें सुदूर संवेदन के सामान्य उदाहरण हैं जिसमें सूर्य का प्रकाश या बिजली से कृत्रिम प्रकाश ऊर्जा वस्तु पर प्रहार करने के लिए बनाई जाती है। प्रकाश ऊर्जा में सभी लंबाई और तीव्रता की विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं। जब विद्युत चुम्बकीय तरंग वस्तु पर पड़ती है, तो वह आंशिक रूप से 1. अवशोषित होती है 2. बिखरी हुई 3. प्रेषित होती है 4. परावर्तित होती है।
भारतीय उपग्रह और प्रक्षेपण यान श्रृंखला (INSAT, IRS, PSLV)
भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम (ISRO) ने सर्वेइंग और संचार के लिए विशिष्ट श्रृंखलाएं विकसित की हैं:
1. INSAT Series (Indian National Satellite System)
उद्देश्य: यह मुख्य रूप से संचार (Communication), मौसम विज्ञान (Meteorology) और आपदा प्रबंधन के लिए है।
विशेषता: ये 'भू-स्थिर' (Geostationary) उपग्रह होते हैं जो पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी की ऊंचाई पर स्थित होते हैं और मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में मदद करते हैं।
2. IRS Series (Indian Remote Sensing)
उद्देश्य: यह श्रृंखला पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए है।
विशेषता: ये उपग्रह 'सूर्य-तुल्यकालिक' (Sun-synchronous) कक्षा में होते हैं। इनका उपयोग कृषि, जल संसाधन, और मानचित्रण (Mapping) के लिए किया जाता है।
3. PSLV Series (Polar Satellite Launch Vehicle)
क्या है? यह उपग्रह नहीं बल्कि एक रॉकेट (प्रक्षेपण यान) है।
कार्य: PSLV का उपयोग मुख्य रूप से 'IRS' जैसे रिमोट सेंसिंग उपग्रहों को अंतरिक्ष की उनकी निर्धारित कक्षा में पहुँचाने के लिए किया जाता है। इसे ISRO का "Workhorse" (सबसे भरोसेमंद रॉकेट) कहा जाता है।
रिमोट सेंसिंग कैसे कार्य करता है?
रिमोट सेंसिंग की प्रक्रिया मुख्य रूप से विद्युत चुम्बकीय विकिरण (Electromagnetic Radiation) पर आधारित होती है:
ऊर्जा स्रोत: सूर्य या कृत्रिम प्रकाश।
अंतःक्रिया: प्रकाश तरंगें वस्तु से टकराती हैं और परावर्तित (Reflect) होती हैं।
रिकॉर्डिंग: उपग्रह पर लगे सेंसर इन परावर्तित तरंगों को रिकॉर्ड करते हैं।
इमेज प्रोसेसिंग: प्राप्त डेटा को ग्राउंड स्टेशन पर भेजा जाता है जहाँ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (जैसे GIS) की मदद से उसका विश्लेषण किया जाता है।
रिमोट सेंसिंग के अनुप्रयोग (Applications in Engineering)
आपने बहुत सही बिंदु लिखे हैं, छात्रों के लिए ये संक्षिप्त बिंदु याद रखना आसान होगा:
संसाधन अन्वेषण: खनिज और भूमिगत जल का पता लगाना।
भूमि उपयोग: जंगलों, शहरों और खेती की जमीन का मानचित्रण।
साइट जांच: बांधों, पुलों और टनल के निर्माण के लिए सही जगह का चयन करना।
आपदा प्रबंधन: बाढ़, सूखा या भूकंप के बाद नुकसान का आकलन करना।
रिमोट सेंसिंग को गहराई से समझने के लिए Active और Passive रिमोट सेंसिंग के बीच का अंतर जानना बहुत ज़रूरी है। सरल शब्दों में कहें तो यह अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि 'ऊर्जा' (Energy) कहाँ से आ रही है।
Passive: जो सूरज की रोशनी का उपयोग करता है।
Active: जो खुद की ऊर्जा (जैसे रडार) का उपयोग करता है।
यहाँ इनके बीच के मुख्य अंतर दिए गए हैं:
1. पैसिव रिमोट सेंसिंग (Passive Remote Sensing)
यह तकनीक ऊर्जा के बाहरी स्रोत पर निर्भर करती है। इसमें सेंसर खुद की रोशनी पैदा नहीं करता।
स्रोत: मुख्य रूप से सूर्य। यह सूर्य से आने वाली किरणों के पृथ्वी से परावर्तित (Reflection) होने का इंतज़ार करता है।
समय: यह केवल दिन के समय काम कर सकता है (जब सूरज की रोशनी हो)।
उदाहरण: एक साधारण कैमरा या उपग्रह जो सूरज की रोशनी में तस्वीरें लेते हैं (जैसे INSAT के कुछ सेंसर)।
2. एक्टिव रिमोट सेंसिंग (Active Remote Sensing)
इसमें उपग्रह या विमान का अपना खुद का ऊर्जा स्रोत (Illumination source) होता है। यह खुद किरणें भेजता है और उनके टकराकर वापस आने का समय और तीव्रता मापता है।
स्रोत: उपकरण का अपना ऊर्जा स्रोत (जैसे रडार की सूक्ष्म तरंगें)।
समय: यह दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है।
खासियत: यह बादलों, कोहरे या धुएं के पार भी देख सकता है।
उदाहरण: RADAR और LiDAR।
तुलना तालिका (Comparison Table)
| विशेषता | पैसिव रिमोट सेंसिंग | एक्टिव रिमोट सेंसिंग |
| ऊर्जा स्रोत | प्राकृतिक (सूर्य की रोशनी) | कृत्रिम (सेंसर की अपनी ऊर्जा) |
| समय | केवल दिन में | दिन और रात दोनों में |
| मौसम का प्रभाव | बादलों और धुंध में काम नहीं करता | बादलों और बारिश में भी काम करता है |
| जटिलता | यह सरल और सस्ती तकनीक है | यह अधिक जटिल और महंगी तकनीक है |
| उपयोग | वनस्पति अध्ययन, भूमि उपयोग मैपिंग | टोपोग्राफी, समुद्र की लहरों की मैपिंग |
NTS Study Pro Tips:
सिविल इंजीनियरिंग के सर्वेइंग प्रोजेक्ट्स में जहाँ घने जंगलों या हमेशा बादलों से ढके रहने वाले इलाकों का सर्वे करना हो, वहाँ Active Remote Sensing (Radar/Lidar) सबसे बेस्ट मानी जाती है।
Surveying
📔 भाग 1: सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत (Fundamentals)
सर्वेक्षण: एक विहंगम परिचय - भूमि सर्वेक्षण का अर्थ और महत्व।भूमि सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत - वर्गीकरण एवं सर्वेक्षण के प्रकार।प्राथमिक विभाजन (Primary Division) - Plane vs Geodetic Surveying का अर्थ।निरूपक भिन्न (Representative Fraction - RF) - स्केल और रिडक्शन फैक्टर का उपयोग।
📏 भाग 2: रैखिक माप और चेन सर्वे (Linear Measurement & Chain Survey)
रैखिक माप और श्रृंखला सर्वेक्षण (Chain Survey) - बेसिक प्रक्रिया।चेन सर्वे में त्रुटियां एवं सुधार - जंजीर मापन की कमियां और उनका निवारण।दूरी मापने की विधियाँ और उनके दोष - रेखीय सर्वेक्षण की विस्तृत चर्चा।टेप या चेन में त्रुटियों का समायोजन - Correction for Sag, Temperature, and Pull.
🧭 भाग 3: कोणीय माप और उपकरण (Angular & Instrumental Survey)
कंपास सर्वे (Compass Surveying) - दिकमान सर्वे और उसका उपयोग।प्लेन टेबल सर्वेक्षण (Plane Table) - प्रयोग होने वाले उपकरण और विधियां।थियोडोलाइट (Theodolite) - इसका प्रयोग कहाँ, क्यों और कैसे किया जाता है?टोटल स्टेशन (Total Station) - मुख्य भाग, विशेषताएं और आधुनिक उपयोग।
🏔️ भाग 4: लेवलिंग और ऊँचाई मापन (Levelling)
लेवलिंग (Smtalan) की आवश्यकता - सर्वेक्षण में लेवलिंग क्यों ज़रूरी है?मुख्य रेखाएं, डेटम और बेंच मार्क - RL (Reduced Level) और Datum की परिभाषा।लेवलिंग उपकरण के प्रयोग के तरीके - Auto Level और Tilting Level का संचालन।
🛰️ भाग 5: आधुनिक तकनीक (Modern Technologies)
रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) - INSAT और IRS Series की जानकारी।GIS और LIS प्रणाली - भौगोलिक सूचना प्रणाली और डेटा फंक्शनलिटी।लेजर स्कैनर (Laser Scanner) - इसका उपयोग और नियंत्रण।पृथ्वी की सतह: जियोइड (Geoid) - पृथ्वी का आकार और दीर्घवृत (Ellipsoid) की समझ।
📝 भाग 6: प्रैक्टिस और ऑब्जेक्टिव प्रश्न (MCQs)
Surveying: Quiz 1 (01-25): GPS, Remote Sensing, Photogrammetry, और Errors (Accuracy/Precision) पर आधारित।Surveying: Quiz 2 (26-50): Ranging, EDM, Tacheometry, और Corrections (Sag, Slope, Temperature) पर आधारित।
Surveying: Quiz 3 (51-75): Contouring, Bearings (True/Magnetic), और Leveling (HI Method, BS/FS) पर आधारित।Surveying: Quiz 4 (76-100): Chain errors, Transition curves, Reciprocal leveling, और Bowditch rule पर आधारित।Surveying: Quiz 5 (101-125): Plane table and Compass पर आधारित ।

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