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रेखीय सर्वेक्षण मे दूरी मापने की विधीय उनके दोष और उनके सुधार

रेखीय सर्वेक्षण (Linear Surveying) में दूरी मापन

सर्वेक्षण में दो बिंदुओं के बीच की दूरी मापने के लिए हम मुख्य रूप से तीन तरीकों का उपयोग करते हैं:

  1. प्रत्यक्ष विधि (Direct Method): इसमें टेप या चेन का सीधा उपयोग किया जाता है।

  2. ऑप्टिकल विधि (Optical Method): इसमें टेकोमीटर (Tacheometer) जैसे उपकरणों का उपयोग किया जाता है जहाँ भौतिक रूप से जमीन पर चलना जरूरी नहीं होता।

  3. ईडीएम विधि (EDM - Electronic Distance Measurement): यह आधुनिक विधि है जो लेजर या इंफ्रारेड तरंगों का उपयोग करती है।


रेखीय सर्वेक्षण (Linear Surveying) में दूरी मापन



टेप सुधार (Tape Corrections)

फील्ड में मापी गई दूरी ($L$) को मानक बनाने के लिए निम्नलिखित सुधार लागू किए जाते हैं:

1. पूर्ण लंबाई के लिए सुधार (Correction for Absolute Length)

जब टेप की वास्तविक लंबाई उसकी बताई गई लंबाई से कम या ज्यादा हो:

$$C_a = \frac{C \cdot L}{l}$$

जहाँ $C$ प्रति टेप लंबाई में सुधार है।

  • नियम: यदि टेप बड़ा है, तो सुधार धनात्मक (+) होगा। यदि टेप छोटा है, तो सुधार ऋणात्मक (-) होगा।

2. तापमान सुधार (Correction for Temperature)

यदि मापन के समय तापमान ($t_m$) मानक तापमान ($t_o$) से भिन्न हो:

$$C_t = \alpha(t_m - t_o)L$$

जहाँ $\alpha$ टेप सामग्री का तापीय प्रसार गुणांक है।

3. खिंचाव (Pull) के लिए सुधार

$$C_p = \frac{(P - P_o)L}{AE}$$

जहाँ $P$ वास्तविक खिंचाव और $P_o$ मानक खिंचाव है।


महत्वपूर्ण सुधार जो आपने मिस किए हैं (NTS Study के लिए सुझाव)

लेख को पूर्ण बनाने के लिए ये दो सुधार भी शामिल करें, क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं (SSC JE/RRB JE) में ये अक्सर पूछे जाते हैं:

4. झोल के लिए सुधार (Correction for Sag)

जब टेप को दो सिरों पर पकड़कर हवा में लटकाया जाता है, तो वह अपने वजन से नीचे झुक जाता है। इसे झोल सुधार कहते हैं।

$$C_s = \frac{L(W)^2}{24P^2}$$

जहाँ $W$ टेप का कुल भार है।

  • महत्वपूर्ण: झोल सुधार (Sag Correction) हमेशा ऋणात्मक (-) होता है।

5. ढाल सुधार (Correction for Slope)

यदि जमीन ढलान वाली है, तो मापी गई दूरी को क्षैतिज बनाने के लिए:

$$C_{slope} = \frac{h^2}{2L}$$

जहाँ $h$ दोनों बिंदुओं के बीच की ऊँचाई का अंतर है।

  • महत्वपूर्ण: ढाल सुधार भी हमेशा ऋणात्मक (-) होता है।


संख्यात्मक उदाहरण (Numerical Example)

प्रश्न: एक 30 मीटर स्टील टेप का उपयोग करके दो बिंदुओं के बीच की दूरी 600 मीटर मापी गई। मापन के दौरान औसत तापमान 35°C था, जबकि टेप 20°C पर मानक (Standardized) किया गया था। टेप का तापीय प्रसार गुणांक ($\alpha$) $11.5 \times 10^{-6} / ^\circ\text{C}$ है। तापमान सुधार (Temperature Correction) ज्ञात कीजिए और सही की गई दूरी (Corrected Distance) की गणना कीजिए।


हल (Solution):

1. दिया गया डेटा (Given Data):

  • मापी गई लंबाई ($L$) = 600 m

  • क्षेत्र का तापमान ($t_m$) = 35°C

  • मानक तापमान ($t_o$) = 20°C

  • तापीय प्रसार गुणांक ($\alpha$) = $11.5 \times 10^{-6} / ^\circ\text{C}$

2. तापमान सुधार का सूत्र (Formula):

$$C_t = \alpha(t_m - t_o)L$$

3. गणना (Calculation):

$$C_t = 11.5 \times 10^{-6} \times (35 - 20) \times 600$$
$$C_t = 11.5 \times 10^{-6} \times 15 \times 600$$
$$C_t = 0.1035 \text{ m}$$

चूंकि क्षेत्र का तापमान ($35^\circ\text{C}$) मानक तापमान ($20^\circ\text{C}$) से अधिक है, इसलिए टेप की लंबाई बढ़ गई होगी। अतः यह सुधार धनात्मक (+ve) होगा।

4. सही की गई दूरी (Corrected Distance):

$$\text{Corrected Distance} = L + C_t$$
$$\text{Corrected Distance} = 600 + 0.1035$$
$$\text{Corrected Distance} = 600.1035 \text{ m}$$


Key Takeaways :

  • Positive Correction: यदि क्षेत्र का तापमान मानक तापमान से अधिक है, तो सुधार जोड़ें।

  • Negative Correction: यदि क्षेत्र का तापमान मानक तापमान से कम है, तो सुधार घटाएं।

  • इकाइयों का ध्यान: हमेशा सुनिश्चित करें कि तापमान $^\circ\text{C}$ में हो और लंबाई मीटर में।



Advance Numerical Example (Sag & Slope Correction)

प्रश्न: एक 30 मीटर स्टील टेप का भार 0.8 kg है। इसका उपयोग 10% की ढाल (Slope) वाली जमीन पर दूरी मापने के लिए किया गया। यदि मापी गई ढालू दूरी (Inclined Distance) 300 मीटर है और मापन के दौरान टेप पर 10 kg का खिंचाव (Pull) लगाया गया, तो निम्नलिखित की गणना कीजिए:

  1. ढाल सुधार (Slope Correction)

  2. झोल सुधार (Sag Correction)

  3. कुल सही की गई क्षैतिज दूरी (Total Corrected Horizontal Distance)


हल (Solution):

1. दिया गया डेटा (Given Data):

  • मापी गई लंबाई ($L$) = 300 m

  • टेप की मानक लंबाई ($l$) = 30 m

  • टेप का कुल भार ($W$) = 0.8 kg (30 मीटर के लिए)

  • लगाया गया खिंचाव ($P$) = 10 kg

  • ढाल (Slope) = 10% (यानी 100 मीटर चलने पर 10 मीटर की ऊँचाई $h$)

2. ढाल सुधार (Slope Correction) की गणना:

300 मीटर की दूरी के लिए ऊँचाई ($h$) होगी:

$$h = 300 \times \frac{10}{100} = 30 \text{ m}$$

सूत्र:

$$C_{slope} = \frac{h^2}{2L}$$
$$C_{slope} = \frac{30^2}{2 \times 300} = \frac{900}{600} = 1.5 \text{ m}$$

(यह हमेशा ऋणात्मक होता है)$C_{slope} = -1.5 \text{ m}$

3. झोल सुधार (Sag Correction) की गणना:

चूंकि टेप 300 मीटर है और हम 30 मीटर के टेप का उपयोग कर रहे हैं, तो कुल 10 अंतराल (spans) होंगे।

कुल भार $W$ एक टेप लंबाई (30m) के लिए 0.8 kg है।

सूत्र:

$$C_s = n \times \left( \frac{l \cdot W^2}{24P^2} \right)$$

या पूरे 300m के लिए

$$C_s = \frac{L \cdot W^2}{24P^2}$$

(यदि $W$ प्रति टेप लंबाई का भार है)

$$C_s = \frac{300 \times (0.8)^2}{24 \times 10^2}$$
$$C_s = \frac{300 \times 0.64}{24 \times 100} = \frac{192}{2400} = 0.08 \text{ m}$$

(यह भी हमेशा ऋणात्मक होता है)$C_s = -0.08 \text{ m}$

4. कुल सुधार और सही दूरी (Total Correction & Final Distance):

$$\text{Total Correction} = C_{slope} + C_s$$
$$\text{Total Correction} = (-1.5) + (-0.08) = -1.58 \text{ m}$$
$$\text{Corrected Horizontal Distance} = L + \text{Total Correction}$$
$$\text{Corrected Horizontal Distance} = 300 - 1.58 = 298.42 \text{ m}$$

NTS Study Pro Tips:

  • ढाल सुधार (Slope Correction): जमीन जितनी अधिक तिरछी होगी, सुधार उतना ही ज्यादा होगा।

  • झोल सुधार (Sag Correction): खिंचाव (Pull) जितना अधिक होगा, झोल उतना ही कम होगा।

  • याद रखें: फील्ड में मापी गई दूरी हमेशा वास्तविक क्षैतिज दूरी से अधिक आती है, इसलिए ये दोनों सुधार हमेशा घटाए जाते हैं।


Surveying

📔 भाग 1: सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत (Fundamentals)

  1. सर्वेक्षण: एक विहंगम परिचय - भूमि सर्वेक्षण का अर्थ और महत्व।

  2. भूमि सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत - वर्गीकरण एवं सर्वेक्षण के प्रकार।

  3. प्राथमिक विभाजन (Primary Division) - Plane vs Geodetic Surveying का अर्थ।

  4. निरूपक भिन्न (Representative Fraction - RF) - स्केल और रिडक्शन फैक्टर का उपयोग।


📏 भाग 2: रैखिक माप और चेन सर्वे (Linear Measurement & Chain Survey)

  1. रैखिक माप और श्रृंखला सर्वेक्षण (Chain Survey) - बेसिक प्रक्रिया।

  2. चेन सर्वे में त्रुटियां एवं सुधार - जंजीर मापन की कमियां और उनका निवारण।

  3. दूरी मापने की विधियाँ और उनके दोष - रेखीय सर्वेक्षण की विस्तृत चर्चा।

  4. टेप या चेन में त्रुटियों का समायोजन - Correction for Sag, Temperature, and Pull.


🧭 भाग 3: कोणीय माप और उपकरण (Angular & Instrumental Survey)

  1. कंपास सर्वे (Compass Surveying) - दिकमान सर्वे और उसका उपयोग।

  2. प्लेन टेबल सर्वेक्षण (Plane Table) - प्रयोग होने वाले उपकरण और विधियां।

  3. थियोडोलाइट (Theodolite) - इसका प्रयोग कहाँ, क्यों और कैसे किया जाता है?

  4. टोटल स्टेशन (Total Station) - मुख्य भाग, विशेषताएं और आधुनिक उपयोग।


🏔️ भाग 4: लेवलिंग और ऊँचाई मापन (Levelling)

  1. लेवलिंग (Smtalan) की आवश्यकता - सर्वेक्षण में लेवलिंग क्यों ज़रूरी है?

  2. मुख्य रेखाएं, डेटम और बेंच मार्क - RL (Reduced Level) और Datum की परिभाषा।

  3. लेवलिंग उपकरण के प्रयोग के तरीके - Auto Level और Tilting Level का संचालन।


🛰️ भाग 5: आधुनिक तकनीक (Modern Technologies)

  1. रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) - INSAT और IRS Series की जानकारी।

  2. GIS और LIS प्रणाली - भौगोलिक सूचना प्रणाली और डेटा फंक्शनलिटी।

  3. लेजर स्कैनर (Laser Scanner) - इसका उपयोग और नियंत्रण।

  4. पृथ्वी की सतह: जियोइड (Geoid) - पृथ्वी का आकार और दीर्घवृत (Ellipsoid) की समझ।


📝 भाग 6: प्रैक्टिस और ऑब्जेक्टिव प्रश्न (MCQs)

  • Surveying: Quiz 1 (01-25): GPS, Remote Sensing, Photogrammetry, और Errors (Accuracy/Precision) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 2 (26-50): Ranging, EDM, Tacheometry, और Corrections (Sag, Slope, Temperature) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 3 (51-75): Contouring, Bearings (True/Magnetic), और Leveling (HI Method, BS/FS) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 4  (76-100): Chain errors, Transition curves, Reciprocal leveling, और Bowditch rule पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 5 (101-125): Plane table and Compass पर आधारित । 



Quick Revision:

रेखीय सर्वेक्षण मे होने वाली त्रुटिया के प्रकार तथा उनके सुधार /संभाव्यता वितरण

रेखीय सर्वेक्षण (Linear Survey) में त्रुटियों के प्रकार और सुधार

रेखीय सर्वेक्षण, विशेषकर चेन या टेप सर्वे करते समय, कई कारणों से माप में अंतर आ जाता है। इन अंतरों को 'त्रुटि' (Error) कहा जाता है। सर्वेक्षण की शुद्धता बनाए रखने के लिए इन त्रुटियों को समझना और उन्हें सुधारना अनिवार्य है।


रेखीय सर्वेक्षण (Linear Survey) में त्रुटियों के प्रकार और सुधार


1. संचयी त्रुटि (Cumulative Errors)

इन्हें सकल त्रुटियां भी कहा जाता है। ये त्रुटियां एक ही दिशा में बढ़ती जाती हैं (या तो हमेशा धनात्मक या हमेशा ऋणात्मक)।

  • कारण: सर्वेयर की लापरवाही, उपकरण का सही न होना (जैसे चेन की लंबाई मानक से कम या ज्यादा होना)।

  • विशेषता: जैसे-जैसे सर्वे की लंबाई बढ़ती है, यह त्रुटि भी बढ़ती जाती है। इसलिए इसे 'संचयी' (इकट्ठा होने वाली) त्रुटि कहते हैं।

  • सुधार: उपकरण को मानक फीते से बार-बार चेक करना और सावधानीपूर्वक रीडिंग लेना।

2. समकारी या व्यवस्थित त्रुटियां (Systematic Errors)

ये त्रुटियां किसी निश्चित नियम या पैटर्न का पालन करती हैं।

  • कारण: तापमान में बदलाव, टेप में खिंचाव (Tension), या टेप का झोल (Sag)।

  • सुधार: इन्हें गणितीय सूत्रों (Mathematical Formulas) के माध्यम से सुधारा जा सकता है।

3. आकस्मिक या यादृच्छिक त्रुटियां (Accidental or Random Errors)

सभी सुधारों के बाद भी जो छोटी-छोटी त्रुटियां बच जाती हैं, उन्हें आकस्मिक त्रुटियां कहते हैं।

  • ये कभी धनात्मक होती हैं तो कभी ऋणात्मक, इसलिए अक्सर ये एक-दूसरे को समाप्त कर देती हैं।

  • इनका विश्लेषण संभाव्यता के सिद्धांत (Theory of Probability) द्वारा किया जाता है।


त्रुटियों का सांख्यिकीय विश्लेषण (Statistical Analysis)

सर्वेक्षण माप सामान्य वितरण (Normal Distribution) या गाऊसी वितरण (Gaussian Distribution) का अनुसरण करते हैं।

सबसे संभावित मान (Most Probable Value - MPV)

चूंकि किसी भी मात्रा का 'वास्तविक मान' (True Value) ज्ञात करना असंभव है, इसलिए हम अंकगणितीय माध्य (Arithmetic Mean) को ही सबसे संभावित मान मानते हैं।

यदि मापी गई मात्रा $x$ है और उसका माध्य $\mu$ है, तो अंतर को अवशिष्ट (Residual) कहा जाता है:

$$v = x - \mu$$

मानक विचलन (Standard Deviation - $\sigma$)

इसे RMS (Root Mean Square) त्रुटि भी कहा जाता है। यह बताता है कि हमारे द्वारा लिए गए ऑब्जर्वेशन माध्य (Mean) से कितने बिखरे हुए हैं।

जनसंख्या मानक विचलन के लिए सूत्र:

$$\sigma = \sqrt{\frac{\sum v^2}{n}}$$

(जहाँ $n$ = प्रेक्षणों की संख्या है)

माध्य की मानक त्रुटि (Standard Error of Mean)

यह बताती है कि हमारे द्वारा निकाला गया माध्य कितना सटीक है:

$$E_{mean} = \frac{\sigma}{\sqrt{n}}$$

रेखीय सर्वेक्षण में सुधार (Corrections in Linear Measurement)

NTS Study के पाठकों के लिए इन सुधारों को याद रखना बहुत ज़रूरी है:

  1. मानक लंबाई के लिए सुधार (Correction for Absolute Length):

    $$C_a = \frac{L \cdot c}{l}$$
  2. तापमान सुधार (Temperature Correction):

    $$C_t = \alpha(T_m - T_o)L$$
  3. झोल सुधार (Sag Correction): (यह हमेशा ऋणात्मक होता है)

    $$C_s = \frac{W^2 L}{24 P^2}$$


न्यूमेरिकल उदाहरण (Numerical Example)

प्रश्न: एक 30 मीटर की स्टील टेप से एक लाइन की लंबाई मापी गई जो 900 मीटर आई। सर्वे के दौरान निम्नलिखित स्थितियाँ पाई गईं:

  1. टेप अपनी मानक लंबाई से 0.05 मीटर अधिक लंबी थी।

  2. क्षेत्र का तापमान 35°C था, जबकि टेप को 20°C पर कैलिब्रेट (मानक) किया गया था।

  3. स्टील के लिए थर्मल विस्तार गुणांक ($\alpha$) = $12 \times 10^{-6} / ^\circ C$ है।

शुद्ध लंबाई (True Length) की गणना करें।


हल (Solution):

Step 1: मानक लंबाई सुधार ($C_a$) की गणना

चूँकि टेप मानक लंबाई से अधिक लंबा है, इसलिए सुधार धनात्मक (Positive) होगा।

  • मापी गई लंबाई ($L$) = 900 m

  • टेप की वास्तविक लंबाई ($l'$) = $30 + 0.05 = 30.05 \text{ m}$

  • टेप की मानक लंबाई ($l$) = 30 m

फार्मूला: शुद्ध लंबाई $= \left( \frac{l'}{l} \right) \times L$

$$\text{शुद्ध लंबाई} = \left( \frac{30.05}{30} \right) \times 900 = 1.00166 \times 900$$

$C_a$ के बाद लंबाई = 901.50 मीटर


Step 2: तापमान सुधार ($C_t$) की गणना

चूँकि $T_m (35^\circ C) > T_o (20^\circ C)$, टेप फैल गया होगा, इसलिए यह सुधार भी धनात्मक होगा।

  • $T_m = 35^\circ C$

  • $T_o = 20^\circ C$

  • $L = 900 \text{ m}$

  • $\alpha = 0.000012$

फार्मूला: $C_t = \alpha(T_m - T_o)L$

$$C_t = 0.000012 \times (35 - 20) \times 900$$
$$C_t = 0.000012 \times 15 \times 900$$

$C_t = 0.162 \text{ मीटर}$


Step 3: अंतिम शुद्ध लंबाई (Total Corrected Length)

अब हम दोनों सुधारों को जोड़ देंगे:

$$\text{अंतिम लंबाई} = \text{Step 1 की लंबाई} + C_t$$
$$\text{अंतिम लंबाई} = 901.50 + 0.162 = \mathbf{901.662 \text{ मीटर}}$$


बिना सुधार के हमारी रीडिंग 900 मीटर थी, लेकिन वैज्ञानिक रूप से शुद्ध लंबाई 901.662 मीटर है। सिविल इंजीनियरिंग में यह 1.662 मीटर का अंतर एक बड़ी निर्माण त्रुटि पैदा कर सकता था, इसीलिए ये सुधार अनिवार्य हैं।

NTS Study प्रो-टिप: हमेशा याद रखें:

  • अगर टेप लंबा है $\rightarrow$ सुधार (+) होगा।

  • अगर टेप छोटा है $\rightarrow$ सुधार (-) होगा।

रिमोट सेंसिंग /सुदूर संवेदन /INSAT Series /IRS Series क्या होते है ?

रिमोट सेंसिंग (सुदूर संवेदन) क्या है?

रिमोट सेंसिंग वह तकनीक है जिसके द्वारा हम किसी वस्तु या क्षेत्र के भौतिक संपर्क में आए बिना उसके बारे में जानकारी प्राप्त करते हैं। यह उपग्रहों (Satellites) या विमानों पर लगे सेंसर के माध्यम से किया जाता है।

रिमोट सेंसिंग को वस्तुओं, क्षेत्र या घटना के बारे में बिना भौतिक संपर्क के जानकारी एकत्र करने की कला और विज्ञान के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। नेत्र दृष्टि और तस्वीरें सुदूर संवेदन के सामान्य उदाहरण हैं जिसमें सूर्य का प्रकाश या बिजली से कृत्रिम प्रकाश ऊर्जा वस्तु पर प्रहार करने के लिए बनाई जाती है। प्रकाश ऊर्जा में सभी लंबाई और तीव्रता की विद्युत चुम्बकीय तरंगें होती हैं। जब विद्युत चुम्बकीय तरंग वस्तु पर पड़ती है, तो वह आंशिक रूप से 1. अवशोषित होती है 2. बिखरी हुई 3. प्रेषित होती है 4. परावर्तित होती है। 

Remote Sensing INSAT Series /IRS Series



भारतीय उपग्रह और प्रक्षेपण यान श्रृंखला (INSAT, IRS, PSLV)

भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम (ISRO) ने सर्वेइंग और संचार के लिए विशिष्ट श्रृंखलाएं विकसित की हैं:

1. INSAT Series (Indian National Satellite System)

  • उद्देश्य: यह मुख्य रूप से संचार (Communication), मौसम विज्ञान (Meteorology) और आपदा प्रबंधन के लिए है।

  • विशेषता: ये 'भू-स्थिर' (Geostationary) उपग्रह होते हैं जो पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी की ऊंचाई पर स्थित होते हैं और मौसम की सटीक भविष्यवाणी करने में मदद करते हैं।

2. IRS Series (Indian Remote Sensing)

  • उद्देश्य: यह श्रृंखला पृथ्वी अवलोकन (Earth Observation) और प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन के लिए है।

  • विशेषता: ये उपग्रह 'सूर्य-तुल्यकालिक' (Sun-synchronous) कक्षा में होते हैं। इनका उपयोग कृषि, जल संसाधन, और मानचित्रण (Mapping) के लिए किया जाता है।

3. PSLV Series (Polar Satellite Launch Vehicle)

  • क्या है? यह उपग्रह नहीं बल्कि एक रॉकेट (प्रक्षेपण यान) है।

  • कार्य: PSLV का उपयोग मुख्य रूप से 'IRS' जैसे रिमोट सेंसिंग उपग्रहों को अंतरिक्ष की उनकी निर्धारित कक्षा में पहुँचाने के लिए किया जाता है। इसे ISRO का "Workhorse" (सबसे भरोसेमंद रॉकेट) कहा जाता है।


रिमोट सेंसिंग कैसे कार्य करता है?

रिमोट सेंसिंग की प्रक्रिया मुख्य रूप से विद्युत चुम्बकीय विकिरण (Electromagnetic Radiation) पर आधारित होती है:

  1. ऊर्जा स्रोत: सूर्य या कृत्रिम प्रकाश।

  2. अंतःक्रिया: प्रकाश तरंगें वस्तु से टकराती हैं और परावर्तित (Reflect) होती हैं।

  3. रिकॉर्डिंग: उपग्रह पर लगे सेंसर इन परावर्तित तरंगों को रिकॉर्ड करते हैं।

  4. इमेज प्रोसेसिंग: प्राप्त डेटा को ग्राउंड स्टेशन पर भेजा जाता है जहाँ कंप्यूटर सॉफ्टवेयर (जैसे GIS) की मदद से उसका विश्लेषण किया जाता है।


रिमोट सेंसिंग के अनुप्रयोग (Applications in Engineering)

आपने बहुत सही बिंदु लिखे हैं, छात्रों के लिए ये संक्षिप्त बिंदु याद रखना आसान होगा:

  • संसाधन अन्वेषण: खनिज और भूमिगत जल का पता लगाना।

  • भूमि उपयोग: जंगलों, शहरों और खेती की जमीन का मानचित्रण।

  • साइट जांच: बांधों, पुलों और टनल के निर्माण के लिए सही जगह का चयन करना।

  • आपदा प्रबंधन: बाढ़, सूखा या भूकंप के बाद नुकसान का आकलन करना।



 रिमोट सेंसिंग को गहराई से समझने के लिए Active और Passive रिमोट सेंसिंग के बीच का अंतर जानना बहुत ज़रूरी है। सरल शब्दों में कहें तो यह अंतर इस बात पर निर्भर करता है कि 'ऊर्जा' (Energy) कहाँ से आ रही है।

Passive: जो सूरज की रोशनी का उपयोग करता है।

Active: जो खुद की ऊर्जा (जैसे रडार) का उपयोग करता है।

यहाँ इनके बीच के मुख्य अंतर दिए गए हैं:

1. पैसिव रिमोट सेंसिंग (Passive Remote Sensing)

यह तकनीक ऊर्जा के बाहरी स्रोत पर निर्भर करती है। इसमें सेंसर खुद की रोशनी पैदा नहीं करता।

  • स्रोत: मुख्य रूप से सूर्य। यह सूर्य से आने वाली किरणों के पृथ्वी से परावर्तित (Reflection) होने का इंतज़ार करता है।

  • समय: यह केवल दिन के समय काम कर सकता है (जब सूरज की रोशनी हो)।

  • उदाहरण: एक साधारण कैमरा या उपग्रह जो सूरज की रोशनी में तस्वीरें लेते हैं (जैसे INSAT के कुछ सेंसर)।


2. एक्टिव रिमोट सेंसिंग (Active Remote Sensing)

इसमें उपग्रह या विमान का अपना खुद का ऊर्जा स्रोत (Illumination source) होता है। यह खुद किरणें भेजता है और उनके टकराकर वापस आने का समय और तीव्रता मापता है।

  • स्रोत: उपकरण का अपना ऊर्जा स्रोत (जैसे रडार की सूक्ष्म तरंगें)।

  • समय: यह दिन और रात दोनों समय काम कर सकता है।

  • खासियत: यह बादलों, कोहरे या धुएं के पार भी देख सकता है।

  • उदाहरण: RADAR और LiDAR


तुलना तालिका (Comparison Table)

विशेषतापैसिव रिमोट सेंसिंगएक्टिव रिमोट सेंसिंग
ऊर्जा स्रोतप्राकृतिक (सूर्य की रोशनी)कृत्रिम (सेंसर की अपनी ऊर्जा)
समयकेवल दिन मेंदिन और रात दोनों में
मौसम का प्रभावबादलों और धुंध में काम नहीं करताबादलों और बारिश में भी काम करता है
जटिलतायह सरल और सस्ती तकनीक हैयह अधिक जटिल और महंगी तकनीक है
उपयोगवनस्पति अध्ययन, भूमि उपयोग मैपिंगटोपोग्राफी, समुद्र की लहरों की मैपिंग

NTS Study Pro Tips:

सिविल इंजीनियरिंग के सर्वेइंग प्रोजेक्ट्स में जहाँ घने जंगलों या हमेशा बादलों से ढके रहने वाले इलाकों का सर्वे करना हो, वहाँ Active Remote Sensing (Radar/Lidar) सबसे बेस्ट मानी जाती है।



Surveying

📔 भाग 1: सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत (Fundamentals)

  1. सर्वेक्षण: एक विहंगम परिचय - भूमि सर्वेक्षण का अर्थ और महत्व।

  2. भूमि सर्वेक्षण के मौलिक सिद्धांत - वर्गीकरण एवं सर्वेक्षण के प्रकार।

  3. प्राथमिक विभाजन (Primary Division) - Plane vs Geodetic Surveying का अर्थ।

  4. निरूपक भिन्न (Representative Fraction - RF) - स्केल और रिडक्शन फैक्टर का उपयोग।


📏 भाग 2: रैखिक माप और चेन सर्वे (Linear Measurement & Chain Survey)

  1. रैखिक माप और श्रृंखला सर्वेक्षण (Chain Survey) - बेसिक प्रक्रिया।

  2. चेन सर्वे में त्रुटियां एवं सुधार - जंजीर मापन की कमियां और उनका निवारण।

  3. दूरी मापने की विधियाँ और उनके दोष - रेखीय सर्वेक्षण की विस्तृत चर्चा।

  4. टेप या चेन में त्रुटियों का समायोजन - Correction for Sag, Temperature, and Pull.


🧭 भाग 3: कोणीय माप और उपकरण (Angular & Instrumental Survey)

  1. कंपास सर्वे (Compass Surveying) - दिकमान सर्वे और उसका उपयोग।

  2. प्लेन टेबल सर्वेक्षण (Plane Table) - प्रयोग होने वाले उपकरण और विधियां।

  3. थियोडोलाइट (Theodolite) - इसका प्रयोग कहाँ, क्यों और कैसे किया जाता है?

  4. टोटल स्टेशन (Total Station) - मुख्य भाग, विशेषताएं और आधुनिक उपयोग।


🏔️ भाग 4: लेवलिंग और ऊँचाई मापन (Levelling)

  1. लेवलिंग (Smtalan) की आवश्यकता - सर्वेक्षण में लेवलिंग क्यों ज़रूरी है?

  2. मुख्य रेखाएं, डेटम और बेंच मार्क - RL (Reduced Level) और Datum की परिभाषा।

  3. लेवलिंग उपकरण के प्रयोग के तरीके - Auto Level और Tilting Level का संचालन।


🛰️ भाग 5: आधुनिक तकनीक (Modern Technologies)

  1. रिमोट सेंसिंग (Remote Sensing) - INSAT और IRS Series की जानकारी।

  2. GIS और LIS प्रणाली - भौगोलिक सूचना प्रणाली और डेटा फंक्शनलिटी।

  3. लेजर स्कैनर (Laser Scanner) - इसका उपयोग और नियंत्रण।

  4. पृथ्वी की सतह: जियोइड (Geoid) - पृथ्वी का आकार और दीर्घवृत (Ellipsoid) की समझ।


📝 भाग 6: प्रैक्टिस और ऑब्जेक्टिव प्रश्न (MCQs)

  • Surveying: Quiz 1 (01-25): GPS, Remote Sensing, Photogrammetry, और Errors (Accuracy/Precision) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 2 (26-50): Ranging, EDM, Tacheometry, और Corrections (Sag, Slope, Temperature) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 3 (51-75): Contouring, Bearings (True/Magnetic), और Leveling (HI Method, BS/FS) पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 4  (76-100): Chain errors, Transition curves, Reciprocal leveling, और Bowditch rule पर आधारित।

  • Surveying: Quiz 5 (101-125): Plane table and Compass पर आधारित । 



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